dussehra,विजय का प्रतीक दशहरा

Dussehra 2023 : बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक दशहरा

दशहरा (dussehra), भारत में मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण हिन्दू त्योहार है जो वर्षभर के मुख्य पर्वों में से एक है। इसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। दशहरा का मुख्य संदेश सत्य और अच्छाई की बुराई पर जीत से है, जिसका प्रतीक भगवान राम के द्वारा लंकापति राक्षस रावण को मारकर पत्नी सीता को मुक्त किया जाना है।

Dussehra बुराई पर अच्छाई की विजय

इस त्योहार के दौरान, लोग भगवान राम के जीवन की कथाओं को नाटक (रामलीला) के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। दशहरा के दिन, रावण के रूप में बनाए गए पुतले को दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होता है।

यह त्योहार भारत के विभिन्न राज्यों और समुदायों में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है, जैसे कि रामलीला नाटक, आयुध पूजा, और मेलों के आयोजन आदि। इसके साथ ही, दशहरा का त्योहार समाज सेवा और सामाजिक एकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

दशहरा क्या है: Dussehra

दशहरा: अच्छाई की जीत का प्रतीक-

भारतीय संस्कृति में अनेक पर्व और उत्सव मनाए जाते हैं, लेकिन दशहरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसका मुख्य कारण है कि यह पर्व सत्य की बुराई से विजय का प्रतीक है।

दशहरा, भारतीय उपमहाद्वीप में मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण हिन्दू त्योहार है। यह त्योहार विजयादशमी के रूप में भी जाना जाता है और इसे वर्षभर के मुख्य पर्वों में से एक माना जाता है। दशहरा के दिन, हिन्दू समुदाय इसे शक्ति और धर्म की विजय मानते हैं, जब भगवान राम ने लंका के राक्षस राजा रावण को मारकर सीता माता को बंधनमुक्त किया था।

विजय का प्रतीक दशहरा

यह त्योहार जगह-जगह विभिन्न रूपों में मनाया जाता है, जैसे कि रामलीला नाटकों के द्वारा और विभिन्न धार्मिक आयोजनों के माध्यम से।

दशहरा का इतिहास:

दशहरा का प्रमुख इतिहास उस घड़ी से जुड़ा है जब भगवान राम ने लंका के राक्षस राजा रावण को मार गिराया था। इसके परिणामस्वरूप, इस पर्व को दशहरा और विजयादशमी के रूप में मनाते हैं।

इसके अलावा, दशहरा का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है, जब कौरवों के द्वारा पांडवों को 12 वर्षों के वनवास और एक वर्ष के अज्ञातवास पर भेजा गया था, उस समय अज्ञातवास के दौरान, अर्जुन विराट राजा के दरबार में गुप्त रूप से काम करते हैं।

एक दिन, विराट के पुत्र उत्तर कुमार गायों की रक्षा के लिए कौरवों के खिलाफ जाते हैं, लेकिन डरकर भागने का प्रयास करते हैं। इस पर, अर्जुन उन्हें रोककर अपने धनुष-वाण को शमी के पेड़ से निकालकर शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हैं।

इसका अर्थ है कि यह दिन अधर्म पर धर्म की, क्रूरता पर मानवता की, और दुराचार पर ईश्वरता की विजय का प्रतीक माना जाता है, और यह विजयादशमी का महत्वपूर्ण माना गया है।

दशहरा कब मनाया जाता है:

Dussehra हर साल भारतीय हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है, जिसका मतलब कि यह सितंबर और अक्टूबर के बीच के महीने में आता है।

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यह त्योहार आमतौर पर 9 दिनों तक चलता है, जिसमें नवरात्रि भी शामिल है और आखिरी दिन दशमी के रूप में मनाया जाता है।

दशहरा कब है

इस वर्ष 2023 में, दशहरा 24 अक्टूबर को मनाया जायेगा, इसी दिन आतिशबाजी के साथ लोग रावण के पुतले का दहन भी करते हैं।

दशहरा का महत्व

दशहरा का पर्व हिंदू कैलेंडर के सातवें महीने अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष के दसवें दिन मनाया जाता है। यह पर्व नवरात्रि के नौ दिवसीय उत्सव के पश्चात समापन पर आता है, और इसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है।

रामलीला: राम की जीवन गाथा

दशहरा पर्व के आयोजन में रामलीला का विशेष स्थान है। रामलीला में भगवान राम के जीवन से संबंधित घटनाओं का मंचन किया जाता है। इसे देखने लोग दूर-दूर से आते हैं। रामलीला के अंत में रावण के पुतले को आग लगाकर इस पर्व का समापन किया जाता है।

रावण दहन: बुराई का नाश

दशहरा की रात का सबसे अधिक प्रतीक्षित क्षण रावण दहन है। बड़े-बड़े मैदानों में रावण, मेघनाद, और कुंभकरण के पुतले तैयार किए जाते हैं। ये पुतले पटाखों से भरे होते हैं और जब उन्हें आग लगाई जाती है, तो वह विस्फोटक प्रदर्शन होता है। यह विस्फोटक प्रदर्शन बुराई के अंत का प्रतीक है।

दशहरा का त्योहार कैसे मनाया जाता है

दशहरा का त्योहार भारत के विभिन्न हिन्दू समुदायों और राज्यों में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है, लेकिन यह आमतौर पर निम्नलिखित तरीकों से मनाया जाता है:

  1. रामलीला : यह एक अत्यंत प्रमुख और प्रचलित परंपरागत प्रक्रिया है जिसमें भगवान राम के जीवन की कहानी को नाटक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह रात्रि-रात्रि चलने वाला नाटक होता है और दशहरा के दिन रावण के पुतलों का दहन इसमें शामिल होता है।
  2. आयुध पूजा : कुछ स्थानों पर दशहरा के दिन, विभिन्न आयुधों और वाहनों की पूजा की जाती है। यह पूजा भगवान विष्णु की उपासना के रूप में की जाती है और व्यापारी समुदायों में विशेष रूप से प्रमुख होती है।
  3. शास्त्र पूजा : कुछ स्थानों पर, दशहरा के दिन विद्या के पुस्तकों और आध्यात्मिक शास्त्रों की पूजा की जाती है। यह शिक्षा और ज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देता है।
  4. मेले और प्रदर्शनी : दशहरा के अवसर पर बड़े मेले और प्रदर्शनी आयोजित किए जाते हैं, जिनमें खानपान, खिलौने, वस्त्रों, और अन्य सामान की खरीददारी की जाती है।
  5. समाज सेवा : कुछ लोग दशहरा के दिन समाज सेवा के रूप में काम करते हैं, जैसे कि ब्लड कैम्प्स, मेडिकल चेकअप्स, और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की मदद करना आदि शामिल है।

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